Just life

Here I am sharing my first poem with the world. I am an introvert ,never shared anything with anybody. but I understand how being alone feels. So i decided to share my tiniest creations with you guys. I hope you will find peace and solace in what I write. . . . . . .… Continue reading Just life

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शाम को मैं जब

शाम को मैं जब, आंगन मैं बैठती हूँ तो वो आसमान, नजर नही आता। वो बदल नहीं दिखते वो ढलता सूरज नज़र नहीं आता। न चिड़ियों का वो वापस घरों को जान दिखता है न हल्के हल्के तारो का अम्बर मैं आना दिखता है। सब ढक गया इन पत्थरो की इमारतों के पीछे लाख नज़र… Continue reading शाम को मैं जब