शाम को मैं जब

शाम को मैं जब, आंगन मैं बैठती हूँ तो वो आसमान, नजर नही आता। वो बदल नहीं दिखते वो ढलता सूरज नज़र नहीं आता। न चिड़ियों का वो वापस घरों को जान दिखता है न हल्के हल्के तारो का अम्बर मैं आना दिखता है। सब ढक गया इन पत्थरो की इमारतों के पीछे लाख नज़र… Continue reading शाम को मैं जब

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I am cold

I am cold but have you given it a thought that here's not too much warmth in your arms may be that's the reason of keeping my heart on hold. I am cold.