Rose day

For you to be a rose on my rose day I wouldn't have thought, how beautiful the feeling it is when you hold, when the fragrance of yours in the air unfold, my breath takes it all in behold, smashing every cell in my body into gold, allowing myself to lose in the delicious aura… Continue reading Rose day

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शाम को मैं जब

शाम को मैं जब, आंगन मैं बैठती हूँ तो वो आसमान, नजर नही आता। वो बदल नहीं दिखते वो ढलता सूरज नज़र नहीं आता। न चिड़ियों का वो वापस घरों को जान दिखता है न हल्के हल्के तारो का अम्बर मैं आना दिखता है। सब ढक गया इन पत्थरो की इमारतों के पीछे लाख नज़र… Continue reading शाम को मैं जब